हम जानते हैं इक बादलों सा अहसास
जो ओस की तरह आकाश से गिरकर
लदता जाता है हमारी पीठ पर
प्यार
हमारी नाक पर बैठा
इतराए
प्यार
फैला खुली हवा में
सूखता कपड़ों के मानिंद
एक स्त्री को तुम्हें
तुम्हारे तिलों और मुहासों समेत
जानने का आनंद
तुम्हारा एक स्त्री को जानना
अपनी टांग की ढीठ दाद से बेहतर
प्यार
घास में कुंद पत्ते
मसले जाते मखमली बागों में
प्यार
दिन के वे उलझे क्षण
जब हम होते समझदारी से परे
या अलस्सुबह
मदमाये कुत्तों के झुंड से भागती
अकेली मादा की दबी पूँछ
प्यार
ऋतुस्राव का गणित
तरल भौतिकी
प्यार
कुछ चीज़ें आ जाती हैं पास
यूंही, उम्मीद से पहले
या टेलीफोन पर घुंटी हमारी आवाज़ें
रात में फुसफुसाती
जब सोईं हो हमारी माएं
बिस्तरों में सीटियाँ बजातीं
समर्थ वाशिष्ठ
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