1
कैसा गज़ब है ये शहर
जहाँ कहीं से कहीं तक कोई बस नहीं जाती.
बसों से बसों तक चलती हैं बसें
सीटों से सीटों तक दौड़ते हैं धावक
दिन-रात.
2
पैदल पारपथ से बाहर निकलते ही
बारिश.
और सप्ताह में पहली बार
ख़ुशी.
3
अवसाद और तनाव में क्या है अंतर
दफ्तर में पूछता है कोई.
अवसाद में नहीं रह सकता कोई खुश
तनाव में रह भी सकता है
कुछ सोचकर कहता हूँ मैं.
4
समय बीतने से पहले
बीत जायेंगे हम
घड़ियाँ तकते-तकते
सुबहों में खिसकाते अलार्म.
5
अलस्सुबह
मोबाइल पर बात करता एक शहर
कहाँ हो रही हैं इतनी बातें
कौन कर रहा है इतनी बातें
मैं क्यूं नहीं हूँ इनके बीच
6
Bookmark/Search this post with
Recent comments
1 year 50 weeks ago
2 years 7 weeks ago
2 years 11 weeks ago
2 years 12 weeks ago